पोषण और आजीविका के लिए फालसा फल ( ग्रोइड एशियाटिकद्ध) का मूल्य संवर्धन
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फालसा, मानव स्वास्थ्य , औषधीय गुण , मूल्य संवर्धनAbstract
फालसा पौधे के सभी भाग जैसे जड़, तना/टहनी, पत्ती एवं फल मानव तथा घरेलू पशुओं के लिए बहुत ही उपयोगी हैं। फालसा एक बहुउद्देशीय फल का उदाहरण है जो भोजन, चारा, फाइबर, ईंधन, लकड़ी और पारंपरिक दवाओं की एक श्रृंखला प्रदान करता है जिसमें विभिन्न बीमारियों का इलाज करने और एंटीबायोटिक गुण होते हैं। फालसा फल कैलोरी और वसा में कम होते हैं, लेकिन इसमें कई विटामिन, फाइबर और आवश्यक खनिज होते हैं। फालसा के फलों को उच्च औषधीय मूल्यों के लिए जाना जाता है क्योंकि फल कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और एंटीकैंसर गुणों के लिए जाने जाते हैं। इसी तरह, फल और बीज पोटेशियम, कैल्शियम, लोहा, फास्फोरस और सोडियम जैसे विभिन्न खनिजों से समृद्ध होते हैं, जबकि जिंक, निकल, कोबाल्ट और क्रोमियम भी सूक्ष्म मात्रा में पाये जाते है। अपरिपक्व फालसा फल सूजन को कम करते हैं और यह श्वसन, हृदय, रक्त विकारों एवं बुखार में भी लाभप्रद होता है। मतली, उल्टी और पेट दर्द के लिए थोड़े से गुलाब जल और चीनी के साथ फालसा का रस राहत प्रदान करता है। सांस की तकलीफ और हिचकी के लिए थोड़े से अदरक के रस और सेंधा नमक के साथ फालसा का गर्म रस राहत प्रदान करने में उपयोगी माना जाता है। इसी तरह, फालसा शर्बत (पेय) चीनी और नींबू के जूस के साथ मिलाकर पीने से पेट और सीने की जलन को कम करने में कारगर है। इसकी छाल का जलसेक दस्त, दर्द, सन्धिवात और गठिया का इलाज करने के लिए उपयोगी माना जाता है। जड़ की छाल का उपयोग दर्द और सूजन में राहत देने के लिए किया जाता है। शक्कर को परिष्कृत करने के लिए फालसा के तने की लसदार छाल का उपयोग किया जाता है। फालसा की छाल के रेशे का उपयोग रस्सियों को बनाने के लिए इसकी पत्तियों में हल्के एंटीबायोटिक गुण होते है। उन्हें रात भर भिगोकर एक पेस्ट बनाया जाता है, जो कट, जलन, फोड़े, एक्जिमा और पुष्ठीय त्वचा के प्रस्फुटन सहित त्वचा की सूजन को राहत देने के लिए जाना जाता है। यह ज्यादातर ताजा खाया जाता है, हालाँकि फलों का सिरप भी तैयार किया जा सकता है, ताकि अधिक समय तक उपयोग किया जा सके। जब गर्मियों के दौरान इसके फल या जूस का सेवन किया जाता है, तो यह शरीर को शीतलता प्रदान करता है। थोड़ा अधपका, लेकिन परिपक्व फल (हरा रंग) का उपयोग सिरका या तेल में डुबो कर अचार बनाने में किया जा सकता है। एक अन्य उत्पाद‘फालसा स्क्वैश, फलों के गूदे और चीनी सिरप से बनाया जाता है। फालसा के फलों के गूदे और चीनी के मिस्रण से जैम तैयार किया जाता है, जो बेकरी उत्पादों के लिए टॉपिंग के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। फालसा के पत्तों और फलों को पानी में उबालकर एक पौष्टिक और सुगंधित हर्बल चाय भी बनायी जा सकती है। म्यांमार में तने की छाल का उपयोग साबुन के विकल्प के रूप में किया जाता है। इसके अलावा, इस पौधे के अन्य भागों का उपयोग विभिन्न रोगों जैसे कैंसर, उम्र बढ़ाने, बुखार, गठिया और मधुमेह के इलाज के लिए हर्बल दवा के रूप में किया जाता रहा है। मजबूत और लचीले होने के कारण, इसकी लकड़ी का उपयोग तीरंदाजों के धनुष, खपच्चियाँ, भाले के हैंडल और डंडों के लिए किया जाता है। इसके तने का उपयोग बगीचे के खंभे के साथ-साथ टोकरी बनाने के लिए भी किया जाता है। फालसा की पत्तियों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में मूत्र पथ के संक्रमण और यौन संचारित रोगों के इलाज के लिए किया जाता है। ताजे पत्ते मवेशियों के चारे के लिए काम में लेते हैं।
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