पुष्प उत्पादन में जीनोम संपादन

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Authors

  • लशिका मीना
  • तिलक चंद्र ICAR-IASRI New Delhi
  • मीर आसिफ इकबाल
  • दिनेश कुमार
  • सारिका जयसवाल

Abstract

सजावटी पौधों में फूलों का रंग उनकी प्रमुख विशेषता होती है, जो उनकी बाजार मांग और आर्थिक मूल्य को निर्धारित करता है। पारंपरिक प्रजनन विधियों द्वारा रंगों में विविधता लाना सीमित तथा समय-साध्य प्रक्रिया रही है, किंतु सीआरआईएसपीआर/कैस9 जैसी जीनोम संपादन तकनीकों ने इस क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। इस तकनीक की सहायता से वैज्ञानिक फूलों के रंगद्रव्यों, जैसे एंथोसायनिन, फ्लेवोनोइड और कैरोटीनॉयड से संबंधित जैवसंश्लेषण मार्गों के जीनों में सटीक और लक्षित परिवर्तन कर सकते हैं।

पेटुनिया, टोरेनिया, पॉइन्सेटिया तथा जापानी जेंटियन जैसे सजावटी पौधों में सीआरआईएसपीआर आधारित जीनोम संपादन के माध्यम से नए और आकर्षक रंग विकसित किए गए हैं, जिन्हें पारंपरिक विधियों से प्राप्त करना संभव नहीं था। यह तकनीक न केवल सजावटी पौधों की आनुवंशिक विविधता और सौंदर्य को बढ़ाने में सहायक है, बल्कि फ्लोरीकल्चर उद्योग को व्यावसायिक दृष्टि से भी सशक्त बनाती है।

भविष्य में जीनोम संपादन तकनीकों के निरंतर विकास से फूलों में रंगों की विविधता, स्थायित्व और उपभोक्ता की पसंद के अनुरूप नए गुणों का विकास संभव होगा, जिससे फ्लोरीकल्चर उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

सजावटी पौधे अपनी सुंदरता, रंग-बिरंगे फूलों, सुगंध और आकर्षक पत्तियों के कारण विशेष महत्व रखते हैं। ये पौधे पर्यावरण को सुशोभित करने के साथ-साथ आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। फ्लोरीकल्चर सजावटी पौधों की खेती और व्यापार से जुड़ा वह क्षेत्र है, जिसमें फूलों, पौधों, गमलों, बीजों तथा उनसे संबंधित उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन शामिल हैं। वर्ष 2021 तक फूलों और सजावटी पौधों का वैश्विक बाजार लगभग 27.23 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था, जिसके वर्ष 2029 तक 45.07 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। यह लगभग 6.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है।

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Published

2026-05-18

How to Cite

मीना लशिका, चंद्र तिलक, इकबाल मीर आसिफ, कुमार दिनेश, & जयसवाल सारिका. (2026). पुष्प उत्पादन में जीनोम संपादन. फल फूल, 47(3), 7-9. https://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/1571