मशरूम की खेती से ग्रामीण युवा बदल रहे अपनी तकदीर
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मशरूम, ग्रामीण युवा , रोजगारAbstract
मशरूम एक विशेष प्रकार फफूंद हैं। इनमें पौधों के समान क्लोरोफिल नही होता है, अतः इसकी खेती बंद कमरे या झोपडी में की जा सकती है। वर्तमान समय में बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण लगातार कृषि जोत भूमि घटती जा रही हैं। इस परिस्थिति में मशरूम की खेती आय का एक अच्छा विकल्प हैं। मशरूम की खेती घर के अन्दर करने योग्य एक लघु व्यवसाय हैं और इसे अन्य फसलों के समान खेत की आवश्यकता नही होती। अतः यह छोटे एंव भूमिहीन किसानों के लिये उपयुक्त व्यवसाय हैं। मशरूम को कृषि के विभिन्न अवशेषों पर उगाते है जिससे कृषि अवशेषों का सर्वोत्तम उपयोग हो जाता हैं। मशरूम उत्पादन के उपरान्त शेष बचे व्यर्थ को खेतो में कम्पोस्ट खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता हैं।
मशरूम को एक व्यवसाय के रूप में अपनाकर बढ़ती हुई बेरोजगारी को कम करने के साथ अपर्याप्त पोषण की समस्याओं का निदान किया जा सकता हैं। हमारे देश में मुख्यतः 4 प्रकार के मशरूम जैसे बटन मशरूम, ढिंगरी मशरूम, दूधिया या मिल्की मशरूम, धान पुआल मशरूम की खेती की जाती हैं। देश में विभिन्न प्रकार की जलवायु एंव ऋतुओं के अनुसार वातावरण में तापमान एंव नमी रहती हैं जिनको ध्यान में रखकर हम अलग-अलग समय पर विभिन्न प्रकार के मशरूमों की खेती कर सकते हैं।
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