गुणों से भरपूर मिक्रोग्रीन्स का उत्पादन

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Authors

  • स्नेहा राठौर PhD Research scholar

Abstract

माइक्रोग्रीन्स हाल के वर्षों में विश्वभर में एक उच्च-मूल्य फसल के रूप में तेजी से लोकप्रिय हुए हैं और इन्हें आज “सुपरफूड” की श्रेणी में भी माना जाता है। ये छोटे पौधे बीज अंकुरण के लगभग 7 से 21 दिनों के भीतर कटाई योग्य हो जाते हैं। आकार में छोटे होने के बावजूद इनमें विटामिन ए, सी, ई और के के साथ-साथ लौह, जिंक, मैग्नीशियम जैसे खनिज, एंटीऑक्सीडेंट तथा कई जैव-सक्रिय यौगिक सामान्य सब्जियों की तुलना में अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने, हृदय स्वास्थ्य को बेहतर करने तथा सूजन-रोधी प्रभाव प्रदान करने में सहायक होते हैं।

उत्पादन की दृष्टि से माइक्रोग्रीन्स कम स्थान, कम समय और अपेक्षाकृत कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसल मानी जाती है। इन्हें कोकोपीट, वर्मीक्यूलाइट, जूट मैट, नारियल रेशा या स्वच्छ मिट्टी जैसे माध्यमों में आसानी से उगाया जा सकता है। आधुनिक तकनीकों जैसे नियंत्रित वातावरण, हाइड्रोपोनिक्स और वर्टिकल फार्मिंग की सहायता से पूरे वर्ष उच्च गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त की जा सकती है। माइक्रोग्रीन्स के सफल उत्पादन के लिए उचित नमी, उपयुक्त तापमान, स्वच्छता और उच्च गुणवत्ता वाले बीज का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

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Author Biography

  • स्नेहा राठौर, PhD Research scholar

    विद्या वाचस्पति छात्र, सब्जी विज्ञान, कृषि महाविद्यालय, जोधपुर

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Published

2026-05-18

How to Cite

स्नेहा राठौर. (2026). गुणों से भरपूर मिक्रोग्रीन्स का उत्पादन. फल फूल, 47(3), 24-26. https://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/1647