देसी फलों का महत्व एवं संरक्षण
87 / 83Keywords:
देशी फल, संरक्षणAbstract
भारत में देसी फलों का कुल क्षेत्रफल लगभग 6.56 प्रतिशत (0.437 मिलियन हैक्टर) है, जबकि इनकी औसत उत्पादकता लगभग 11.47 टन प्रति हैक्टर तक पाई जाती है। इसके बावजूद देसी फलों को कृषि विकास की मुख्यधारा में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया है। वर्तमान में वैश्विक भूख सूचकांक में भारत का 123 देशों में 102वाँ स्थान देश में कुपोषण की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। वर्तमान समय में बढ़ती जनसंख्या, कुपोषण तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को देखते हुए देसी फलों का संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। देसी फल कई व्यावसायिक फलों की तुलना में खनिज तत्वों, एंटीऑक्सीडेंट्स तथा फाइटोन्यूट्रिएंट्स से अधिक समृद्ध होते हैं। यदि इन फसलों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण, सुधार तथा मूल्यवर्धन किया जाए, तो ये खाद्य सुरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
भारत विविध भौगोलिक, जलवायु और पारिस्थितिक परिस्थितियों वाला एक समृद्ध देश है, जहाँ हजारों वर्षों से विभिन्न प्रकार के देसी फल उगाए जाते रहे हैं। ये फल न केवल पारंपरिक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य, आय और सांस्कृतिक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए हैं। देसी फल, जिन्हें कभी-कभी “अल्प-उपयोगी” फल कहा जाता है, आज भी पोषण, औषधीय और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत मूल्यवान हैं।
देसी फलों में प्राकृतिक रूप से विटामिन, खनिज, एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोन्यूट्रिएंट्स की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने, शरीर को रोगों से बचाने और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। कई देसी फल जैसे आंवला, बेल, बेर और करौंदा आयुर्वेद तथा पारंपरिक चिकित्सा में अपने औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध हैं। इनके नियमित सेवन से कुपोषण और विटामिन की कमी को कम करने में सहायता मिलती है तथा हृदय रोग, मधुमेह और पाचन संबंधी समस्याओं जैसी जीवनशैली से जुड़े रोगों के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।
Downloads
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2026 फल फूल

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.
फल फूल में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।