नैनो उर्वरकों का जीरा उत्पादन में योगदान

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Authors

  • योगेन्द्र कुमार इंडियन पफारमर्स पफर्टिलाइजर कोआपरेटिव लि., इपफको सदन, सी-1, डिस्ट्रिक्ट सेंटर, साकेत प्लेस, साकेत, नई दिल्ली-110017
  • ए. पी. सिंह इंडियन पफारमर्स पफर्टिलाइजर कोआपरेटिव लि., इपफको सदन, सी-1, डिस्ट्रिक्ट सेंटर, साकेत प्लेस, साकेत, नई दिल्ली-110017
  • किशन सिंह इंडियन पफारमर्स पफर्टिलाइजर कोआपरेटिव लि., इपफको सदन, सी-1, डिस्ट्रिक्ट सेंटर, साकेत प्लेस, साकेत, नई दिल्ली-110017
  • तरुणेन्दु सिंह इंडियन पफारमर्स पफर्टिलाइजर कोआपरेटिव लि., इपफको सदन, सी-1, डिस्ट्रिक्ट सेंटर, साकेत प्लेस, साकेत, नई दिल्ली-110017
  • के. एन. तिवारी इंडियन पफारमर्स पफर्टिलाइजर कोआपरेटिव लि., इपफको सदन, सी-1, डिस्ट्रिक्ट सेंटर, साकेत प्लेस, साकेत, नई दिल्ली-110017

Abstract

जीरा, रबी मौसम की प्रमुख मसाला वर्गीय फसल है। यह लोहा, तांबा, कैल्शियम, पोटेशियम, मैंगनीज, सेलेनियम, जिंक और मैग्नीशियम, रेशा तथा विटामिन का एक उत्कृष्ट स्रोत है। जीरे का उत्पादन करने वाले देशों में भारत, तुर्की, सीरिया, ईरान और चीन प्रमुख देश हैं। भारत में जीरे की खेती मुख्यतः राजस्थान तथा गुजरात राज्यों में की जाती है। वर्ष 2018-19 में भारत में कुल 10.27 लाख हैक्टर क्षेत्रापफल में खेती की गई और औसत उपज 681 किलोग्राम / हैक्टर रही। वहीं वर्ष 2018-19 में राजस्थान में जीरे की खेती 6.76 लाख हैक्टर क्षेत्रा में की गयी परंतु उत्पादकता 658 किलोग्राम / हैक्टर रही, जो देश की औसत उपज से भी कम है। राजस्थान की मृदा में नाइट्रोजन की कमी सर्वव्यापी है एवं 50% मृदा में जिंक तथा 10% मृदा में तांबे की कमी भी पायी गई है। अजमेर, बाड़मेर, जालौर, जोध्पुर, नागौर, भीलवाड़ा, टोंक, जोध्पुर, सिरोही, सीकर और पाली जिले जीरा उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रा हैं।

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Published

2022-11-16

How to Cite

कुमार योगेन्द्र, सिंह ए. पी., सिंह किशन, सिंह तरुणेन्दु, & तिवारी के. एन. (2022). नैनो उर्वरकों का जीरा उत्पादन में योगदान. फल फूल, 43(6), 28-29. https://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/19