शहतूत उत्पादन की उन्नत विधि

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Authors

  • शालिनी सिंह सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ (यूपी)
  • विभू पाण्डेय सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ (यूपी)

Abstract

शहतूत (मोरस प्रजातियाँ) मोरेसी कुल का एक महत्वपूर्ण पौध है। विभिन्न महाद्वीपों में व्यापक भौगोलिक विस्तार के कारण इसे विश्व के विशिष्ट पौधें में गिना जाता है। शहतूत
मुख्य रूप से मोरी रेशम के उत्पादन में अपने आर्थिक महत्व के लिए जाना जाता है। इसके अतिरिक्त, शहतूत का उपयोग एक औषधीय पौधे के रूप में भी किया जाता है।
इसकी पत्तियों, तनों और जड़ों में पाए जाने वाले जैविक रूप से सक्रिय तथा औषधीय गुणों से युक्त घटक मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं। प्रस्तुत लेख
में शहतूत उत्पादन में अपनाई जाने वाली प्रमुख बागवानी विधियों का वर्णन किया गया है।

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Published

2026-10-08

How to Cite

शालिनी सिंह, & विभू पाण्डेय. (2026). शहतूत उत्पादन की उन्नत विधि. फल फूल, 47(1), 36-38. https://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/1901