अरारोट की खेती में संभावनाएं
1896 / 89Abstract
अरारोट का वानस्पतिक नाम कुरकुमा अंगुस्टीपफोबिया है। यह हल्दी जाति का पौध है जिसकी जड़, सपफेद चूर्ण के रूप में उपयोगी होती है। आज अपने औषधीय गुणों के कारण यह देश-विदेश में भी लोकप्रिय बन गया है। यह हमारे देश में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इसे हिंदी भाषी तीखुर, तवाखीर या अरारोट कहते हैं, वहीं संस्कृत में इसे तवक्षीर, पयछीर, एवज, तालछीर कहते हैं। अंग्रेजी में इसे इंडियन एरोरूट, ओडिशा में पलुवा, कन्नड़ में कोबिहित्तु, बांग्ला में टीवक्कुर, तेलगु में अरारूट गडालू, नेपाली में बारखी सारो, मलयालम में कुवां तथा गुजराती में तेवखरा कहते हैं।
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