हर्बल शर्करा-स्टेविया

93 / 45

Authors

  • हनुमान सिंह कृषि महाविद्यालय, हिण्डोली, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा
  • शत्तिफ सिंह भाटी कृषि महाविद्यालय, हिण्डोली, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा
  • राजेन्द्र कुमार कृषि महाविद्यालय, नागौर, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर

Abstract

स्टेविया एक औषधीय महत्व का पौध है। इसका व्यापक स्तर पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार हो सकते हैं। यह भारत में कृषि के लिए अपेक्षाकृत नया पौध है तथा इसकी खेती बड़े स्तर पर अभी मुख्यतया कर्नाटक तथा महाराष्ट्र राज्यों तक ही सीमित है। स्टेविया (स्टेविया रेबुडियाना) आमतौर पर मीठी तुलसी, मीठापत्ता, चीनीपत्ता, शहदपत्ता या केवल स्टेविया या मधुरगुणा के नाम से जाना जाता है। इसे संस्कृत भाषा में मधुपत्रा के नाम से भी जाना जाता है। यह पौध अपनी मीठी पत्तियों के लिए व्यापक रूप से उगाया जाता है। यह एस्ट्रेसीकुल से संबंध्ति है एवं इसका उपयोग प्राकृतिक शर्करा तथा शर्करा के अन्य स्रोत के रूप में करते हैं। यह रासायनिक शर्करा जैसे स्प्लेंडा, सेकेरीन एवं एस्पारटेम को तेजी से प्रतिस्थापित कर रहा है। इसकी लगभग 240 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसकी पत्तियां सामान्य शर्करा से लगभग 30-40 गुना मीठी होती हैं।

Downloads

Download data is not yet available.

Downloads

Published

2024-01-18

How to Cite

सिंह हनुमान, भाटी शत्तिफ सिंह, & कुमार राजेन्द्र. (2024). हर्बल शर्करा-स्टेविया. फल फूल, 45(1), 15. https://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/837