खजूर में कृत्रिम परागण

555 / 58

Authors

  • कपिल मोहन शर्मा खजूर अनुसंधन केंद्र, सरदार कृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय, मुंद्रा-कच्छ, गुजरात
  • देवशी ए. बैडीयावदरा खजूर अनुसंधन केंद्र, सरदार कृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय, मुंद्रा-कच्छ, गुजरात
  • सी. एम. मुरलीध्रन खजूर अनुसंधन केंद्र, सरदार कृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय, मुंद्रा-कच्छ, गुजरात
  • अंकिता अमन खजूर अनुसंधन केंद्र, सरदार कृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय, मुंद्रा-कच्छ, गुजरात

Abstract

खजूर एक पामी (एरीकेसी) कुल का वृक्ष है। इसका वानस्पतिक नाम फ्रियनिक्स डेक्टेलिफेरा (Phoeniñ dactylifera) है। यह पृथकलिंगी पाम की श्रेणी में आता है। नर और मादा फूल अलग-अलग पेड़ों पर लगते हैं। प्राकृतिक रूप से परागण में सफलता कम मिलती है, अतः कृत्रिम परागण किया जाता है। ऽजूर की खेती एक समयबद्ध कार्य है तथा इसका विशेष महत्व है। कृत्रिम परागण के लिए नर फूलों से एकत्रित पराग छिड़काव का किया जाता है। नर पुष्पगुच्छ की ताजी खुली हुई कुछ लड़ियों को खिले हुए मादा पुष्पगुच्छ के बीच में उल्टा करके हल्के से बांध्कर परागण करते हैं। फूल खुलने के 2-3 दिनों के अंदर परागण न करने पर बीजरहित फल मिलते हैं। ये खाने योग्य नहीं होते। काफी बार समय से या कम पराग मिलने पर इन्हें संग्रह करके या अक्रियाई वस्तुओं के साथ मिलाकर पूर्ति की जाती है। यह लेख इन सभी कार्यों को करने की विध्  बिधि चर्चा करता है।

Downloads

Download data is not yet available.

Downloads

Published

2024-01-18

How to Cite

शर्मा कपिल मोहन, बैडीयावदरा देवशी ए., मुरलीध्रन सी. एम., & अमन अंकिता. (2024). खजूर में कृत्रिम परागण. फल फूल, 45(1), 22-23. https://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/841