साबूदाना उत्पादन के लिए कसावा है बहुमूल्य

152 / 147

Authors

  • विजेंद्र कुमार मीना भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-132001 (हरियाणा)
  • फूल सिंह हिण्डोरिया भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-132001 (हरियाणा)
  • प्रियंका मीना श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर (राजस्थान)
  • राकेश कुमार भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-132001 (हरियाणा)
  • संजीव कुमार भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-132001 (हरियाणा)

Abstract

कसावा की खेती विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में की जाती है। यह मूलरूप से दक्षिण अमेरिका का पौधा है। भारत में मुख्य रूप से तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक में कसावा की खेती की जाती है। यह एक झाड़ीनुमा पौधा होता है। यह कंद वाली फसलों की श्रेणी में आता है। यह देखने पर शकरकंद की तरह दिखाई देता है। इसका वैज्ञानिक नाम मनिहाॅट एस्‍कुलेंटा है। कसावा से निकलने वाला टैपिओका शुद्ध कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है। इसका उपयोग विश्व में आहार के रूप में किया जाता है। साबूदाना का सेवन भारत में व्रत या उपवास में खाने के लिए किया जाता है।

Downloads

Download data is not yet available.

Downloads

Published

2024-01-18

How to Cite

मीना विजेंद्र कुमार, हिण्डोरिया फूल सिंह, मीना प्रियंका, कुमार राकेश, & कुमार संजीव. (2024). साबूदाना उत्पादन के लिए कसावा है बहुमूल्य. फल फूल, 45(1), 29-30. https://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/845