शून्य जुताई विधि से फलोत्पादन
215 / 46सार
किसान पफलों के बाग में पारंपरिक जुताई का अभ्यास करते हैं जिसका कार्बनिक पदार्थों की मात्रा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप पोषक तत्वों के भंडार में कमी के अलावा मिट्टी की संरचना का ह्रास होता है। बाग की मिट्टी की लंबे समय तक यांत्रिक खेती से वृक्ष की वृद्धि तथा उपज पर भी हानिकारक प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा वृक्षों की पंक्तियों के बीच यांत्रिक उपकरणों के पहुंच से पौधे को चोट लगती है। इससे विशेष रूप से इनकी जड़ों, तने के निचले हिस्सों एवं परिधीय शाखाओं पर आघात पहुंचता है। पारंपरिक जुताई से मिट्टी का क्षरण होता है। भूमि प्रबंध्न प्रणाली के अध्ययन में मिट्टी के रासायनिक, जैविक और भौतिक गुणों के साथ-साथ जड़ क्षेत्रा के सूक्ष्मजीवीय समुदायों और पेड़ की जड़ के विकास पर अलग-अलग प्रभाव देखा गया है। पेड़ों के पफल उत्पादन में, बगीचे में सतह प्रबंध्न प्रणालियों का उद्देश्य इनके विकास के लिए सर्वाेत्तम परिवेश तैयार करना है, जिससे
वृक्षों का बेहतरीन प्रदर्शन हो सके।
##plugins.themes.default.displayStats.downloads##
##submission.downloads##
प्रकाशित
अंक
खंड
##submission.license##
##submission.copyrightStatement##
##submission.license.cc.by-nc-sa4.footer##फल फूल में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।