जुलाई-अगस्त माह में बागों की देखभाल
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बिना जल मानव-सभ्यता की कल्पना कर पाना भी कठिन है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में वर्षा ट्टतु में बरसने वाला जल कृषि की अधिकतर जल-संबंधी आवश्यकताओं को पूर्ण करता है। बरसात के दिनों में जल के सभी प्राकृतिक स्रोत जैसे नदियां, तालाब, गड्ढे आदि पानी से भर जाते हैं। जुलाई-अगस्त (सावन-भादो) में होने वाली वर्षा पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों से लेकर मनुष्य तक में उल्लास और उत्साह का संचरण कर देती है। इस ऋतु में वानस्पतिक वृद्धि अधिक होने के कारण चारों तरफ हरियाली ही हरियाली देखने को मिलती है। अतः बागों में खरपतवार भी बहुतायत में हो जाते हैं। अनुकूल तापमान और आद्र्रता के कारण, इस ऋतु में कीटों और व्याधियों का प्रकोप अधिक हो जाता है।
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