बसंतकालीन गन्ने की उन्नत खेती


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Authors

  • प्रदीप राजपूत
  • रविंद्र कुमार राजपूत
  • आदेश सिंह
  • गौरव शुक्ला

Abstract

उत्तर प्रदेश में कापफी बड़े क्षेत्रापफल में गन्ने की खेती की जाती है। प्रदेश में मुख्यतः जलोढ़ मृदा पाई जाती है। इसकी बनावट दोमट मृदा जैसी होती है तथा इसमें पर्याप्त नमी संग्रह क्षमता होती है। गन्ने की बढ़वार के लिए सबसे उपयुक्त मौसम जुलाई से अक्टूबर तक सीमित है। इसमें गन्ने की अधिकाधिक 85 प्रतिशत बढ़वार हो सकती है। मार्च से जून के मध्य गन्ना प्रति सप्ताह 0.8 इंच बढ़ता है तथा गन्ने की कुल लंबाई का 15 प्रतिशत एवं कुल शुष्क वजन का 12 प्रतिशत भाग इसी अवधि में पूरा हो जाता है। जून से अक्टूबर के मध्य गन्ने की बढ़वार दर 4.9 इंच प्रति सप्ताह होती है। अक्टूबर से अप्रैल के मध्य गन्ने की बढ़वार दर घटकर 1.1 इंच प्रति सप्ताह रह जाती है। तेज धूप वाले दिन और ठंडी रातें शर्करा संचयन के लिए अनुकूल वातावरण है, जो सामान्यतः अक्टूबर से मार्च तक होता है। मार्च के बाद तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ने पर शर्करा में गिरावट आनी प्रारंभ हो जाती है। अक्टूबर से दिसंबर के मध्य में शर्करा संचयन 0.5 इकाई प्रति सप्ताह तथा जनवरी से मार्च के मध्य 0.24 इकाई प्रति सप्ताह की दर से होती है।

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Submitted

2023-02-17

Published

2023-02-17

How to Cite

राजपूत प., राजपूत र. क., सिंह आ., & शुक्ला ग. (2023). बसंतकालीन गन्ने की उन्नत खेती. खेती, 75(10), 16-18. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/142