हरे चारे के लिए मक्का
382 / 171
Abstract
हरा चारा पशुओं के आहार के लिए सबसे सस्ता स्रोत है, जो कम लागत में पशुपालकों को अधिक आय दिलवाने में सहायक है। पशुधन क्षेत्रा के सतत् विकास के लिए नियमित रूप से पर्याप्त और पौष्टिक चारे की आपूर्ति अति आवश्यक है। लगातार बढ़ती जनसंख्या की खाद्यान्न आपूर्ति के लिए खाद्य पफसलों का क्षेत्रापफल बढ़ने, शहरीकरण एवं औद्योगिकीकरण के कारण चारे वाली पफसलों के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रापफल निरन्तर कम अथवा स्थिर हो गया है। वर्तमान समय में देश में क्रमशः 35.6, 10.95 एवं 44 प्रतिशत हरा चारा, शुष्क चारा और सान्द्र आहार की कमी दर्ज की गई है। इस कमी को पूरा करने के लिए हरे चारे की आधुनिक विधि से खेती करना ही एकमात्रा विकल्प शेष रह जाता है। इसलिए उपलब्ध संसाधनों का सही और उन्नत तकनीकी के साथ उपयोग करते हुये पशुओं को आवश्यक मात्रा में चारा प्रदान कर सकते हैं।
Downloads
Downloads
Submitted
Published
Issue
Section
License

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.
खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।