कृषि आधारित उद्यमशीलता द्वारा स्वावलम्बन
190 / 74Abstract
कृषि क्षेत्रा का वर्ष 2022-23 में राष्ट्रीय आय में सकल योगदान 18 प्रतिशत है। यह क्षेत्रा समाज के संख्यात्मक रूप से बड़े और कमजोर वर्ग को प्रत्यक्ष रोजगार एवं आय प्रदान करता है। कृषि क्षेत्रा में उत्पादन और लाभप्रदता में सुधार के लिए कृषि उद्यमिता न केवल एक अवसर है, बल्कि एक आवश्यकता भी है। कृषि आधारित उद्यमिता भारत में टिकाऊ आर्थिक विकास हासिल करने में भी मदद करती है। प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, पर्यावरण-अनुकूल कृषि आदि टिकाऊ कृषि में कृषि उद्यमिता हमारी अर्थव्यवस्था के प्रमुख चालक हैं और ग्रामीण भारत का परिवेश बदलने की क्षमता रखते हैं। अतः विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने, गरीबी को दूर करने, लोगों के जीवन स्तर को उठाने और कृषि एवं पशुपालन को अत्यधिक लाभकारी बनाने के लिए कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में उद्यमिता एक अच्छा उपाय सिद्ध हो सकती है।
Downloads
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2024 खेती

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.
खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।