दलहन प्रसंस्करण केंद्रों से आय संवर्धन

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Authors

  • उमा साह ICAR-IIPR, Kanpur

Keywords:

दलहन मूल्य शृंखला, प्रसंस्करण इकाई

Abstract

दालें भारतीय भोजन के साथ-साथ देश के लाखों लघु एवं सीमांत कृषकों की आजीविका का भी प्रमुख आधार हैं। दालों की मूल्य शृंखला लंबी, जटिल एवं बहु-स्तरीय होने के कारण कृषकों को उनकी उपज का अपेक्षाकृत कम मूल्य प्राप्त होता है, जबकि उपभोक्ताओं को दालें अधिक कीमत पर खरीदनी पड़ती हैं। भा.कृ.अनु.प.–भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर द्वारा संचालित  फार्मर फर्स्ट और आदर्श दलहन ग्राम परियोजनाओं के अंतर्गत दलहन प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना कर कृषक समितियों को प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किए गए हैं। इन प्रयासों से कृषकों को न केवल मूल्य संवर्धन के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त हुई, बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध होने से कटाई उपरांत नुकसान भी घटा है। परियोजना ग्रामों में स्थापित मिनी दाल मिलों के माध्यम से कृषकों ने लगभग ₹35,000 से ₹50,000 तक की अतिरिक्त आय अर्जित की है। इस मॉडल को अपनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने, युवाओं और महिलाओं को स्थानीय रोजगार प्रदान करने तथा किसानों की आय में वृद्धि करने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

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Published

2026-05-04

How to Cite

उमा साह. (2026). दलहन प्रसंस्करण केंद्रों से आय संवर्धन. खेती, 79(1), 14-16. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/1448