लाभ से भरपूर मखाना सह मत्स्य पालन प्रणाली

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Authors

  • अभेद पाण्डेय College of Fisheries (Bihar Animal Sciences University), Kishanganj, Bihar

Keywords:

मखाना, मछली पालन, बेहतर पैदावार, एकीकृत प्रबंधन

Abstract

मखाना या फॉक्स नट (यूरियाल फेरोक्स सालिब), एक महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि जलीय फसल है जो भारत के पूर्वी राज्यों विशेषकर बिहार, असम, मणिपुर, और उत्तर प्रदेश में पारंपरिक रूप से उगाई जाती है। यह निम्फेसी परिवार का पौधा है जो स्थिर और उथले जल निकायों जैसे तालाबों और पोखरों में उगता है। मखाना के बीजों में उच्च मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज और औषधीय गुण होते हैं, जिससे इसका उपयोग खाद्य पदार्थ, आयुर्वेदिक दवाओं और न्यूट्रास्युटिकल उत्पादों में बढता जा रहा है। मखाना की खेती मुख्यतः दो विधियों से की जाती है, पारंपरिक प्रणाली और वैज्ञानिक प्रणाली। पारंपरिक पद्धति में स्थानीय ज्ञान और अनुभव के आधार पर फसल उगाई जाती है, जबकि वैज्ञानिक विधियों में बीज चयन, पौधा संरक्षण, पौधों की दूरी, जल प्रबंधन और उपज की कटाई के तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है। वैज्ञानिक तकनीकों के प्रयोग से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मछली के साथ मखाना की एकीकृत खेती निचले भूमि वाले किसानों के लिए एक पर्यावरण-अनुकूल लाभदायक विकल्प है। मखाना और मछली परस्पर लाभकारी फसलें हैं क्योंकि मखाना का अपशिष्ट कार्बनिक पदार्थ बनाता है जो प्लवक के विकास के लिए पोषण स्रोत के रूप में कार्य करता है और जूप्लवक के विकास के लिए आधार भी प्रदान करता है जो बदले में मछलियों के भोजन का काम करता है, जबकि मछली न केवल आय में वृद्धि करती है बल्कि मखाना कीटों को नियंत्रित करके लाभ में भी योगदान देती है तथा मछली का मलमूत्र जैविक खाद का काम भी करता है। 

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Published

2026-05-04

How to Cite

पाण्डेय अभेद. (2026). लाभ से भरपूर मखाना सह मत्स्य पालन प्रणाली. खेती, 79(1), 8-11. https://epatrika.icar.org.in/index.php/kheti/article/view/1450