दलहन आधारित उद्यमिता की संभावनाएं
88 / 28Abstract
‘उद्यमी’ से आशय ऐसे प्रतिभावान एवं दूरदृष्टा व्यक्ति से है. जो व्यवसाय के अवसरों को समझते हैं तथा उन्हें अपनाने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। इसी क्रम में विभिन्न कार्यक्रमों और प्रशिक्षण के माध्यम से उद्यमी में वित्तीय, विपणन एवं प्रबंधकीय विशेषज्ञता तथा उद्यमशीलता ज्ञान और कौशल को बढ़ाना ही उद्यमिता विकास कहलाता है। कृषि उद्यमिता सामान्यतः टिकाऊ, समुदाय तथा प्रणाली उन्मुख दृष्टिकोण को दर्शाती है। दालों की बढ़ती मांगों, अवसरों और चुनौतियों के कारण युवाओं/किसानों को उद्यमी बनने के अवसर देती है। युवाओं के लिए विशेषज्ञता, उद्यम विविधीकरण, उत्पाद विकास, नवाचार प्रक्रिया और ऊध्र्वाधर एकीकरण आदि उद्यमशीलता के विकल्प दलहन से संबंधित व्यवसाय में नियोजित किए जाने चाहिए।
Downloads
Downloads
Published
Issue
Section
License
Copyright (c) 2023 खेती

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License.
खेती में प्रकाशित लेखों का कॉपीराइट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पास निहित है, जिसे भारत या विदेश में किसी भी संगठन के साथ किसी भी समझौते में प्रवेश करने का अधिकार है, जो रिप्रोग्राफी, फोटोकॉपी, भंडारण और सूचना के प्रसार में शामिल है। इन पत्रिकाओं में सामग्री का उपयोग करने में परिषद को कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते जानकारी का उपयोग अकादमिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं। आईसीएआर को देय क्रेडिट लाइन दी जानी चाहिए जहां सूचना का उपयोग किया जाएगा।