बोनसाई उत्पादन-युवाओं के लिए उभरता व्यवसाय

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Authors

  • मीनू कुमारी उद्यान पुष्प एवं भृदृश्य विभाग, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर
  • परमवीर सिंह उद्यान पुष्प एवं भृदृश्य विभाग, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर
  • ललिता राणा राजेंद्र प्रसाद केंदीय कृषि विश्वविद्यालय
  • श्वेता कुमारी बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, कांक

Abstract

बोनसाई मुख्यतः काष्ठीय पौधें को उनके वास्तविक रूप से छोटा बनाकर छोटे गमलों या पात्रों में उगाने की कला है। इस शैली का उद्गम लगभग 2000 वर्ष पूर्व चीन में हुआ था, लेकिन इसकी वैश्विक लोकप्रियता जापान में बढ़ी। शब्द ‘‘बोनसाई‘‘ जापानी भाषा से लिया गया है, जिसमें ‘‘बोन‘‘ का अर्थ है ट्रे और ‘‘साई‘‘ का अर्थ है पौध। शाब्दिक अर्थ है ‘‘पौधा ट्रे में उगाया गया। बोनसाई तैयार करते समय वृक्षों को विशेष तकनीकों द्वारा छोटा आकार दिया जाता है, ताकि पौधे के सभी गुण सुरक्षित रहें। यह प्रकृति की सुंदरता का संक्षिप्त रूप प्रस्तुत करता है और बड़े वृक्षों व पौधें को सीमित जगह में प्राकृतिक रूप में प्रदर्शित करने का अवसर देता है। वर्तमान समय में बोनसाई रखने का प्रचलन तीव्र गति से बढ़ रहा है। छोटे-छोटे गमलों में तैयार बोनसाई विशेष रूप से लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि ये प्राकृतिक दृश्य को सजीव रूप में प्रस्तुत करते हैं। बोनसाई के माध्यम से बड़े वृक्षों और पौधें को उनके प्राकृतिक स्वरूप में सीमित स्थान में उगाया जा सकता है, जो शहरी परिवेश के लिए अत्यंत उपयुक्त है। बोनसाई उत्पादन एक लाभकारी और रचनात्मक व्यवसाय है, जो युवाओं के लिए रोजगार सृजन, कला कौशल विकास और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

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Published

2026-10-08

How to Cite

मीनू कुमारी, परमवीर सिंह, ललिता राणा, & श्वेता कुमारी. (2026). बोनसाई उत्पादन-युवाओं के लिए उभरता व्यवसाय. फल फूल, 47(1), 4-7. https://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/1893