मचान विधि से सब्जी उत्पादन

0 / 1

लेखक

  • रिया मिश्रा आनुवंशिकी एवं पौध प्रजनन विभाग, , राजमाता विजयाराजे सिंध्यिा कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर, मध्य प्रदेश-474002
  • माखन सिंह कराड़ा वानिकी विभाग, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर, मध्य प्रदेश-482004

सार

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा ऋतु के दौरान खेती के लिए उपयुक्त विकल्पों की खोज हमेशा से रही है। देश में वर्षा ऋतु (जुलाई से सितंबर) सब्जी उत्पादन के लिए एक उपयुक्त समय होता है। इस मौसम में विशेष रूप से ककुर्बिटेसी कुल की सब्जियाँ या फिर बेलवाली सब्जियाँ जैसे लौकी, तोरई, कद्दू, करेला, खीरा, ककड़ी, टिंडा आदि की खेती लाभकारी होती है तथा वर्षा ऋतु में बहुत अधिक उत्पादन प्रदान करती हैं। ये सब्जियाँ पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं और इनकी बाजार में मांग भी अध्कि रहती है। लेकिन वर्षा ऋतु में सब्जी उत्पादन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस मौसम में अत्यध्कि नमी, जलभराव और रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे पफसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है। ऐसे में मचान विधि एक उपयोगी, वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधन के रूप में सामने आती है। इन सब्जियों की खेती यदि पारंपरिक पद्धति की बजाय मचान विधि से की जाए, तो उत्पादन, गुणवत्ता और किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। यह विधि कम लागत में, स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर, अधिक उपज देने वाली तकनीक है।

##plugins.themes.default.displayStats.downloads##

##plugins.themes.default.displayStats.noStats##

##submission.downloads##

प्रकाशित

2025-11-01