शुष्क एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों की पोषक सब्जी काचरी
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काचरी (कुकुमिस कैलोसस) एक अल्पविकसित फल सब्जी है, जिसे मुख्यतः शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों में उगाया जाता है। यह कुकर्बिटेसी कुल का एकप्रमुख पौधा है,
जिसे हिंदी में ‘काचरी’, संस्कृत में ‘कर्कटी’ व मरुजा और अंग्रेजी में ‘वाइल्ड मेलन’ या ‘स्माॅल मेलन’ के नाम से जाना जाता है। यह कुकुमिस वंश से संबंधित है जो मुख्यतः
रेगिस्तानी और अर्ध--रेगिस्तानी क्षेत्रों जैसे राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में जंगली रूप में पाई जाती है। यह झाड़ियों या खेत की मेड़ों पर सहज रूप में उगती है। इसकी
बेलें जमीन पर फैलती हैं और छोटे-छोटे फलों का उत्पादन करती हैं। इसके फल का उपयोग मुख्यतः चटनी, अचार और मसालेदार व्यंजन बनाने में किया जाता है। साथ ही
यह पाचन में सहायक तथा औषधीय गुणों से युक्त होती है। राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में यह एक पारंपरिक ऽाद्य स्रोत के रूप में लोकप्रिय है और स्थानीय बाजारों में इसकी
अच्छी मांग होती है।
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