पैशन फ्रूट की लाभकारी खेती

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लेखक

  • नेहा धीमान सहायक प्रोफेसर (फल विज्ञान) डाॅ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन
  • इंद्र देव विस्तार शिक्षा निदेशक डाॅ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन
  • राजेश्वर सिंह चंदेल कुलपति, डाॅ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन
  • जया चौधरी वैज्ञानिक (प्लांट पैथोलाॅजी), कृषि विज्ञान केंद्र चंबा, सरू

सार

भारत में विविध फसलों के साथ-साथ सब्जियों और फलों की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। इन्हीं में से एक है पैशन प्रूफट- एक उष्णकटिबंधीय फल जिसकी उत्पत्ति दक्षिण अमेरिका से मानी जाती है। अपने औषधीय और पोषण गुणों के कारण अब इसकी खेती भारत के कई राज्यों में की जा रही है। हिंदी में इसे कृष्णा फल के नाम से भी जाना जाता है। पैशन प्रूफट का वैज्ञानिक नाम पैसीफ्रलोरा एडुलिस है। इसके दो प्रमुख प्रकार पाए जाते हैं- बैंगनी रंग का पैसीफ्रलोरा एडुलिस एफ. एडुलिस और पीले रंग का पैसीफ्रलोरा एडुलिस
एफ. फ्रलाविकार्पा। इस पौधे की बेलनुमा लताएँ होती हैं, जिन पर अंडाकार फल लगते हैं। फलों का रंग किस्म के अनुसार पीला या बैंगनी हो सकता है। मीठे-खट्टे स्वाद और औषधीय गुणों के कारण पैशन प्रूफट न केवल उपभोक्ताओं में लोकप्रिय हो रहा है, बल्कि किसानों के लिए भी आय का एक नया स्रोत बनकर उभर रहा है।

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प्रकाशित

2025-11-01