खीरा फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन

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Authors

  • राज किरण ICAR-NBPGR
  • प्रज्ञा रंजन
  • भरत राज मीणा
  • भरत गावड़े

Keywords:

पॉलीहाउस, खीरा

Abstract

खीरा भारत की एक महत्वपूर्ण कद्दूवर्गीय सब्जी फसल है। भारत सहित अन्य देशों मे खीरा सलाद के रूप में प्रयोग किया जाता है तथा इसके बीजों से तेल भी निकाला जाता है, जो शरीर एवं मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। खीरे में लगभग 96 प्रतिशत जल होता है तथा यह अनेक पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन सी, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन एवं पोटाश पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं। इन गुणों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी बाजारों तक खीरे की मांग बनी रहती है। कम अवधि में तैयार होने वाली फसल होने के कारण यह किसानों के आय का एक अच्छा स्रोत है। वर्तमान समय में बदलती जलवायु परिस्थितियाँ, अनियमित वर्षा, बढ़ती आर्द्रता तथा तापमान में उतार-चढ़ाव खीरे की खेती को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में कीट एवं रोगों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है, जिससे फसल की उपज एवं गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं। कई बार किसान उन्नत बीज, उर्वरक एवं सिंचाई पर पर्याप्त निवेश करते हैं, लेकिन कीट एवं रोग प्रबंधन की उपेक्षा के कारण अपेक्षित उत्पादन प्राप्त नहीं कर पाते।

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Published

2026-09-25

How to Cite

राज किरण, प्रज्ञा रंजन, भरत राज मीणा, & भरत गावड़े. (2026). खीरा फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन. फल फूल, 47(5), 46-48. https://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/2091