सितम्बर-अक्तूबर के मुख्य बागवानी कार्य

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Authors

  • हरे कृष्ण भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • अनूप प्रताप सिंह भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • राघवेंद्र प्रताप सिंह भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • विनय कुमार पटेल भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • शेखर सिंह भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

Abstract

शरद ऋतु को परिवर्तन, संतुलन और प्राकृतिक सौंदर्य की ऋतु  माना जाता है। भारतीय पारंपरिक पंचांग के अनुसार शरद ऋतु  मुख्यतः अश्विन एवं कार्तिक मास में पड़ती है, जो सामान्यतः सितंबर से अक्तूबर के मध्य की अवधि होती है। बागवानी की दृष्टि से यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि विभिन्न खरीफ फसलों की कटाई तथा विभिन्न बागवानी फसलों की तुड़ाई इसी अवधि संपन्न होती है। इसलिए इसे कटाई अथवा तुड़ाई की ऋतु भी कहा जाता है। इस काल में मनाए जाने वाले ओणम (केरल), नुआखाई  (ओडिशा) तथा छठ पूजा (बिहार एवं पूर्वी भारत) जैसे पर्व नई कृषि उपज के प्रति कृतज्ञता, प्रकृति के प्रति सम्मान तथा सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। ये पर्व भारतीय कृषि परंपरा और प्रकृति के साथ मानव के घनिष्ठ संबंध को भी प्रतिबिंबित करते हैं। शरद ऋतु के दौरान दिन की  अवधि तथा तापमान में होने वाले परिवर्तन पौधें की अनेक शारीरिक एवं जैव रासायनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। समशीतोष्ण फल वृक्षों में क्लोरोपिफल का अपघटन होने लगता है, जिससे कैरोटिनाॅइड एवं एन्थोसाइनिन जैसे रंगद्रव्य स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं और पत्तियाँ पीले, नारंगी अथवा लाल रंग धरण कर लेती हैं। दूसरी ओर, उष्णकटिबंध्ीय एवं उपोष्णकटिबंधीय फल वृक्षों में यद्यपि पर्णपात सामान्यतः नहीं होता, फिर भी इस अवधि में प्रकाश-संश्लेषण, वृद्धि  तथा पोषक तत्वों के पुनर्वितरण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ सक्रिय रहती हैं, जो आगामी वृद्धि वं फलन की आधरशिला तैयार करती हैं।

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Published

2026-09-25

How to Cite

हरे कृष्ण, अनूप प्रताप सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, विनय कुमार पटेल, & शेखर सिंह. (2026). सितम्बर-अक्तूबर के मुख्य बागवानी कार्य. फल फूल, 47(5), 55-60. https://epatrika.icar.org.in/index.php/phalphool/article/view/2337